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Bihar News: बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नियम बदले, कीमत छिपाने पर 100% जुर्माना

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Alam Ki Khabar: बिहार में भारतीय स्टांप संशोधन विधेयक-2026 लागू हो गया है। अब जमीन या मकान की रजिस्ट्री में संपत्ति की वास्तविक कीमत छिपाने पर 100 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा।

पटना, 29 जुलाई। आलम की खबर: बिहार में जमीन और मकान की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए राज्य सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। भारतीय स्टांप संशोधन विधेयक-2026 लागू होने के बाद अब संपत्ति की वास्तविक कीमत छिपाकर कम स्टांप शुल्क देने की कोशिश करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नए प्रावधानों के तहत राजस्व चोरी साबित होने पर चोरी गई राशि के बराबर यानी 100 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही सरकार ने राजस्व चोरी की जांच अवधि भी बढ़ा दी है।

नए नियमों के अनुसार यदि किसी संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान जानबूझकर उसकी वास्तविक कीमत कम दिखाई जाती है और इससे सरकारी राजस्व का नुकसान होता है, तो संबंधित व्यक्ति को पूरी चोरी गई राशि के बराबर जुर्माना देना होगा। पहले अधिकतम 10 प्रतिशत तक जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन अब इसे काफी सख्त कर दिया गया है।

सरकार ने जांच प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। पहले ऐसे मामलों की जांच दो वर्ष के भीतर की जाती थी, लेकिन अब चार वर्ष तक जांच की जा सकेगी। इससे पुराने मामलों की भी प्रभावी जांच संभव होगी और राजस्व चोरी करने वालों पर कार्रवाई आसान होगी।

नए कानून के तहत जिलाधिकारी अथवा सहायक निबंधन महानिरीक्षक द्वारा आदेश जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को 60 दिनों के भीतर बकाया राशि और जुर्माना जमा करना होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो उस पर ब्याज भी लगाया जाएगा। हालांकि कुल ब्याज की राशि मूल राजस्व चोरी की रकम से अधिक नहीं होगी।

रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सहायक निबंधन अधिकारियों को भी नई शक्तियां दी गई हैं। अब यदि किसी संपत्ति के बाजार मूल्य को लेकर संदेह होगा तो रजिस्ट्री से पहले ही मामला जिलाधिकारी या सहायक निबंधन महानिरीक्षक के पास भेजा जा सकेगा। वहां बाजार मूल्य का निर्धारण होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

सरकार ने सुनवाई व्यवस्था में भी बदलाव किया है। पहले ऐसे मामलों का निपटारा केवल जिलाधिकारी के स्तर पर होता था, लेकिन अब सहायक निबंधन महानिरीक्षक को भी सुनवाई और निर्णय का अधिकार दिया गया है। इससे मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार में लगभग 15.94 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई, जिनमें करीब 80 प्रतिशत जमीन से जुड़े मामले थे। राज्य में हर वर्ष औसतन 20 हजार राजस्व चोरी के मामले सामने आते हैं। इन्हीं मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से सरकार ने जीपीएस मैपिंग और आधुनिक जांच व्यवस्था को भी मजबूत किया है।

सरकार का मानना है कि नए नियम लागू होने से स्टांप शुल्क चोरी पर रोक लगेगी, राजस्व संग्रह बढ़ेगा और जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। वहीं संपत्ति खरीदने और बेचने वाले लोगों को अब रजिस्ट्री के समय सही बाजार मूल्य का उल्लेख करने पर विशेष ध्यान देना होगा।

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विशेष टिप्पणी:

जमीन की रजिस्ट्री में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त कानून आवश्यक माने जाते हैं। हालांकि ईमानदार खरीदारों और विक्रेताओं के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे सभी दस्तावेज और संपत्ति का मूल्य सही तरीके से दर्ज कराएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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